Tuesday, June 14, 2022

दिल ही तो है

 

{115,1}

दिल ही तो है न संग‐ओ‐ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यूँ
रोएंगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यूँ

{115,2}

दैर नहीं हरम नहीं दर नहीं आसताँ नहीं
बैठे हैं रह-गुज़र पे हम ग़ैर हमें उठाए क्यूँ

{115,3}

जब वो जमाल-ए दिल-फ़ुरोज़ सूरत-ए मिहर-ए नीम-रोज़
आप ही हो नज़ारा-सोज़ पर्दे में मुंह छुपाए क्यूँ

{115,4}

दशना-ए ग़मज़ा जाँ-सिताँ नावक-ए नाज़ बे-पनाह
तेरा ही अकस-ए रुख़ सही सामने तेरे आए क्यूँ

{115,5}

क़ैद-ए हयात‐ओ‐बंद-ए ग़म अस्ल में दोनों एक हैं
मौत से पहले आदमी ग़म से निजात पाए क्यूँ

{115,6}

हुस्न और उस पे हुस्न-ए ज़ंन रह गई बू अल-हवस की शर्म
अपने पे एतमाद है और को आज़माए क्यूँ

{115,7}

वाँ वो ग़ुरूर-ए इज़्ज़‐ओ‐नाज़ याँ ये हिजाब-ए पास-ए वज़ा
राह में हम मिलें कहाँ बज़्म में वो बुलाए क्यूँ

{115,8}

हाँ वो नहीं ख़ुदा-परस्त जाओ वो बेवफ़ा सही
जिस को हो दीन‐ओ‐दिल अज़ीज़ उस की गली में जाए क्यूँ

{115,9}

ग़ालिब-ए ख़सता के बग़ैर कौन-से काम बंद हैं
रोइये ज़ार ज़ार क्या कीजिये हाए हाए क्यूँ

Saturday, June 11, 2022

A popular gazal from Meer

 

*{485,1}

हस्ती अपनी हबाब की सी है
ये नुमाइश सराब की सी है

[{485,2}]

नाज़ुकी उस के लब की क्या कहये
पंख्ड़ी इक गुलाब की सी है

*{485,3}

चश्म-ए दिल खोल उस भी आलम पर
याँ की औक़ात ख़्वाब की सी है

[{485,4}]

बार बार उस के दर पे जाता हूँ
हालत अब इज़तिराब की सी है

[{485,5}]

नुक़ता-ए ख़ाल से तिरा अबरू
बैत इक इंतिख़ाब की सी है

[{485,6}]

मैं जो बोला कहा कि ये आवाज़
उसी ख़ाना-ख़राब की सी है

[{485,7}]

आतिश-ए ग़म में दिल भुना शायद
देर से बू कबाब की सी है

[{485,8}]

देखिये अब्र की तरह अब के
मेरी चश्म-ए पुर-आब की सी है

*{485,9}

मीर उन नीम-बाज़ आंखों में
सारी मस्ती शराब की सी है

Thursday, June 9, 2022

Some popular verses of Ghalib 5

 

{66,1}

लाज़िम था कि देखो मिरा रस्ता कोई दिन और
तंहा गये क्यूँ अब रहो तंहा कोई दिन और

{66,2}

मिट जाएगा सर गर तिरा पतथर न घिसेगा
हूँ दर पे तिरे नासिया-फ़रसा कोई दिन और

{66,3}

आये हो कल और आज ही कहते हो कि जाऊँ
माना कि हमेशा नहीं अचछा कोई दिन और

{66,4}

जाते हुए कहते हो क़ियामत को मिलेंगे
क्या ख़ूब क़ियामत का है गोया कोई दिन और

{66,5}

हाँ ऐ फ़लक-ए पीर जवाँ था अभी आरिफ़
क्या तेरा बिगड़ता जो न मरता कोई दिन और

{66,6}

तुम माह-ए शब-ए चार-दहम थे मिरे घर के
फिर क्यूँ न रहा घर का वो नक़्शा कोई दिन और

{66,7}

तुम कौन-से थे ऐसे खरे दाद‐ओ‐सितद के
करता मलक उल-मौत तक़ाज़ा कोई दिन और

{66,8}

मुझ से तुम्हें नफ़रत सही नैयर से लड़ाई
बच्चों का भी देखा न तमाशा कोई दिन और

{66,9}

गुज़्री न ब हर हाल ये मुद््दत ख़ुश‐ओ‐ना-ख़ुश
करना था जवाँ-मरग गुज़ारा कोई दिन और

{66,10}

नादाँ हो जो कहते हो कि क्यूँ जीते हैं ग़ालिब
क़िस्मत में है मरने की तमन्ना कोई दिन और


Some popular verses of Ghalib-4

 

{62,1}

है बसकि हर इक उन के इशारे में निशाँ और
करते हैं मुहब्बत तो गुज़रता है गुमाँ और

{62,2}

या रब वो न समझे हैं न सम्झेंगे मिरी बात
दे और दिल उन को जो न दे मुझ को ज़बाँ और

{62,3}

अबरू से है क्या उस निगा-ए नाज़ को पैवंद
है तीर मुक़र्रर मगर उस की है कमाँ और

{62,4}

तुम शहर में हो तो हमें क्या ग़म जब उठेंगे
ले आएंगे बाज़ार से जा कर दिल‐ओ‐जाँ और

{62,5}

हर-चंद सुबुक-दस्त हुए बुत-शिकनी में
हम हैं तो अभी राह में है संग-ए गिराँ और

{62,6}

है ख़ून-ए जिगर जोश में दिल खोल के रोता
होते जो कई दीदा-ए ख़ून-आबा-फ़िशाँ और

{62,7}

मरता हूँ उस आवाज़ पे हर-चंद सर उड़ जाए
जल्लाद को लेकिन वो कहे जाएं कि हाँ और

{62,8}

लोगों को है ख़ुरशीद-ए जहाँ-ताब का धोका
हर रोज़ दिखाता हूँ मैं इक दाग़-ए निहाँ और

{62,9}

लेता न अगर दिल तुम्हें देता कोई दम चैन
करता जो न मरता कोई दिन आह‐ओ‐फ़िग़ाँ और

{62,10}

पाते नहीं जब राह तो चढ़ जाते हैं नाले
रुकती है मिरी तबा तो होती है रवाँ और

{62,11}

हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अचछे
कहते हैं कि ग़ालिब का है अंदाज़-ए बयाँ और

Sunday, June 5, 2022

Some popular verses of Ghalib 3

 

{46,1}

जौर से बाज़ आए पर बाज़ आएं क्या
कहते हैं हम तुझ को मुंह दिखलाएँ क्या

{46,2}

रात दिन गर्दिश में हैं सात आस्माँ
हो रहेगा कुछ न कुछ घबराएं क्या

{46,3}

लाग हो तो उस को हम सम्झें लगाओ
जब न हो कुछ भी तो धोका खाएं क्या

{46,4}

हो लिये क्यूँ नामा-बर के साथ साथ
या रब अपने ख़त को हम पहुंचाएं क्या

{46,5}

मौज-ए ख़ूँ सर से गुज़र ही क्यूँ न जाए
आसतान-ए यार से उठ जाएँ क्या

{46,6}

उमर भर देखा किया मरने की राह
मर गये पर देखिये दिखलाएं क्या

{46,7}

पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है
कोई बतलाओ कि हम बतलाएं क्या

Advice from a Tibetan Master

Always recognize the dreamlike qualities of life and reduce attach- ment and aversion. Practice good-heartedness toward all beings. Be lovin...