Thursday, June 9, 2022

Some popular verses of Ghalib 5

 

{66,1}

लाज़िम था कि देखो मिरा रस्ता कोई दिन और
तंहा गये क्यूँ अब रहो तंहा कोई दिन और

{66,2}

मिट जाएगा सर गर तिरा पतथर न घिसेगा
हूँ दर पे तिरे नासिया-फ़रसा कोई दिन और

{66,3}

आये हो कल और आज ही कहते हो कि जाऊँ
माना कि हमेशा नहीं अचछा कोई दिन और

{66,4}

जाते हुए कहते हो क़ियामत को मिलेंगे
क्या ख़ूब क़ियामत का है गोया कोई दिन और

{66,5}

हाँ ऐ फ़लक-ए पीर जवाँ था अभी आरिफ़
क्या तेरा बिगड़ता जो न मरता कोई दिन और

{66,6}

तुम माह-ए शब-ए चार-दहम थे मिरे घर के
फिर क्यूँ न रहा घर का वो नक़्शा कोई दिन और

{66,7}

तुम कौन-से थे ऐसे खरे दाद‐ओ‐सितद के
करता मलक उल-मौत तक़ाज़ा कोई दिन और

{66,8}

मुझ से तुम्हें नफ़रत सही नैयर से लड़ाई
बच्चों का भी देखा न तमाशा कोई दिन और

{66,9}

गुज़्री न ब हर हाल ये मुद््दत ख़ुश‐ओ‐ना-ख़ुश
करना था जवाँ-मरग गुज़ारा कोई दिन और

{66,10}

नादाँ हो जो कहते हो कि क्यूँ जीते हैं ग़ालिब
क़िस्मत में है मरने की तमन्ना कोई दिन और


No comments:

Post a Comment

Advice from a Tibetan Master

Always recognize the dreamlike qualities of life and reduce attach- ment and aversion. Practice good-heartedness toward all beings. Be lovin...