Sunday, June 5, 2022

Some popular verses of Ghalib 3

 

{46,1}

जौर से बाज़ आए पर बाज़ आएं क्या
कहते हैं हम तुझ को मुंह दिखलाएँ क्या

{46,2}

रात दिन गर्दिश में हैं सात आस्माँ
हो रहेगा कुछ न कुछ घबराएं क्या

{46,3}

लाग हो तो उस को हम सम्झें लगाओ
जब न हो कुछ भी तो धोका खाएं क्या

{46,4}

हो लिये क्यूँ नामा-बर के साथ साथ
या रब अपने ख़त को हम पहुंचाएं क्या

{46,5}

मौज-ए ख़ूँ सर से गुज़र ही क्यूँ न जाए
आसतान-ए यार से उठ जाएँ क्या

{46,6}

उमर भर देखा किया मरने की राह
मर गये पर देखिये दिखलाएं क्या

{46,7}

पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है
कोई बतलाओ कि हम बतलाएं क्या

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