ईश्वर एक कविता है
सुन्दर, अबूझ, आधुनिक कविता
छन्दों में बँधा नहीं—मुक्त ।
सोच की जो सीमा है अपनी
उसी से आगे निकला है वह असीम।
थामे है सृष्टि को
हल्के हाथों से,
बहुत हल्के
इतने कि
अहसास ही नहीं
उसकी छुअन का।
इसीलिए
जो होता है,
होने देता है;
जो नहीं होता
उसे भी यदा-कदा
होने देता है ।
दूर गगन में जो दृष्टि है
जाँचती-परखती है—
कसौटी अनजान है
अच्छा-बुरा शुभ-अशुभ
उसकी मुस्कान है
प्रश्न चिह्न हमारे हैं— वह पूर्ण विराम है।
राजीव १०.१०.२०२०
Poet seems to have touched the mystery of God ; a touch so gentle that we feel it like the touch of God
ReplyDelete