इन्सान सिर्फ़ मौत से बचने के लिए ही नहीं जीता। अगर वह ऐसा करता है , तो मेरी सलाह है कि वह ऐसा न करे।मेरी सलाह है कि वह मौत को अधिक नहीं तो कम से कम ज़िन्दगी जितना प्यार करना सीखे। कोई कह सकता है कि यह एक मुश्किल बात है और इस पर अमल करना भी मुश्किल है। मगर हर उचित काम मुश्किल तो होता ही है। चढ़ाई हमेशा मुश्किल होती है और उतराई आसान और अक्सर फिसलन भरी होती है। ज़िन्दगी तभी तक जीने लायक़ होती है जबतक मौत को दुश्मन नहीं बल्कि दोस्त माना जाता है। ज़िन्दगी के प्रलोभनों को जीतने के लिए मौत की मदद लीजिए ।मौत को टालने के लिए एक कायर आदमी इज़्ज़त, पत्नी, पुत्री सब कुछ सौंप देता है।और एक बहादुर आदमी अपनी इज़्ज़त खोने के बजाय मौत को गले लगाना ज़्यादा पसन्द करता है।जब वक़्त आयेगा, जो कि आ सकता है, तब मैं अपनी सलाह लोगों की कल्पना के लिए नहीं छोड़ूँगा , बल्कि उसे ठोस शब्दों में व्यक्त करके दिखाऊँगा।
२३ नवंबर १९४७
महात्मा गांधी
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